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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

यदि कहीं मूल या व्यापक लक्ष्यवाले धर्म की अवहेलना हो; तो उसके मार्मिक और प्रभावशाली विरोध के लिए, किसी परिमित क्षेत्र के धर्म या मर्यादा का उल्लंघन असंगत नहीं।