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वात्स्यायन के उद्धरण

यदि कामातुर पुरुष अवस्था से अवस्थांतर मरणवस्थापर्यंत पहुँच जाए, तो वह उपघात अपने शरीर की रक्षा के लिए परस्त्री से संभोग कर सकता है।