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वात्स्यायन के उद्धरण

जिस स्त्री का पति पहले आप का मित्र रहा हो और बाद में शत्रु बनकर अनिष्ट करना चाहता हो, तो उस स्त्री के साथ प्रेम-संबंध स्थापित करना अनुचित नहीं हैं, क्योंकि वह अपने पति को उसके साथ पुनः पूर्ववत् संबंध स्थापित करने के लिए प्रेरित कर सकेगी।