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वात्स्यायन के उद्धरण

जिसका पति धनवान्, एश्वर्यसम्पन्न हो और आपका शत्रु हो, प्रेम में होने से वह अपने पति को आपके अनुकूल कर; आपके साथ अनिष्ट करने से रोक सके—ऐसी परकीया नारी के साथ संसर्ग करना अनुचित नहीं है।