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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

तुलसीदासजी भक्ति को प्रधान रखकर चलनेवाले अर्थात् भक्तिमार्गी थे। उनकी भक्तिभावना में यद्यपि तीनों का योग है, पर धर्म का योग पूर्ण परिणाम में है। धर्म-भावना का उनकी भक्ति-भावना से नित्य संबंध है।