ठेकेदार-अफ़सर में जो स्नेह-संबंध सदियों से बना है, उसे भ्रष्टाचार पता नहीं किस तर्क से मान लिया गया है। इस स्नेह-संबंध के कारण ही निर्माण कार्य होते हैं। पुल बनते हैं, जो साल-भर में ही तिड़कने लगते हैं। सरकारी इमारतें बनती हैं, जो पहली बरसात में ही धसकने लगती हैं। सड़क बनती है, जिस पर बनते ही गड्ढे पड़ने लगते हैं। ठेकेदारों की संपन्नता और अफ़सरों के सुखी जीवन का रहस्य—यही ठेकेदार-अफ़सर प्रेम-संबंध है।