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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

तमाम झूठे विश्वासों, मिथ्याचारों, कर्मकांडों, तर्कहीन धारणाओं, पाखंडों को कंठ में अंगुली डाल-डालकर और पानी भरकर उल्टी करानी पड़ती है, तब धर्म की अफ़ीम का नशा उतरता है।