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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

शोभा यात्रा उनकी निकलती है, जो भभूत रमाने-वाले शिव के पत्थर के लिंग पर सोना मढ़ते हैं। शोभा यात्रा उनकी निकलती है, जो दसवीं शताब्दी के बाद दुनिया में क्या हुआ, यह नहीं जानते और आधुनिक समाज को उपदेश देते हैं।