महादेवी वर्मा के उद्धरण
शिक्षा हमें एक-दूसरे के निकट लाने वाला सेतु न बनकर; विभाजित करने वाली खाई बन गई है, जिसे हमारी स्वार्थपरता प्रतिदिन विस्तृत से विस्तृततर करती जा रही है।
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