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सुकरात के उद्धरण

शारीरिक सुखों और दुःखों के प्रति अनासक्त रहना ही वास्तविक मृत्यु है। आत्मा को शरीर से पृथक् रखने का सतत प्रयत्न ही मृत्यु का अभ्यास है।