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वात्स्यायन के उद्धरण

नायक को सर्वप्रथम नायिका से परिचय प्राप्त करना चाहिए, फिर उससे वार्तालाप के सिलसिले में परस्पर भावों का आदान-प्रदान और जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।