Font by Mehr Nastaliq Web

हरिशंकर परसाई के उद्धरण

सरकार कहती है; मक्खी मारो, मगर मक्खी बची हों तो मारें। सचिवालय से लेकर तहसील तक इतने कर्मचारी मक्खी मारा करते हैं कि अब मारने के लिए मक्खी ढूँढ़नी पड़ेगी।