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वात्स्यायन के उद्धरण

सामान्य रूप से योनि में लिंग-प्रवेश को 'उपसृप्तक' कहा गया है। यह विधि न्यायसंगत और ऋतु है, इसमें सामान्य रूप से इंद्रियों को मिलाकर संभोग-क्रिया की जाती है।