Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

साहित्य किसी जाति की रक्षित वाणी की वह अखंड परंपरा है, जो उसके जीवन के स्वतंत्र स्वरूप की रक्षा करती हुई, जगत् की गति के अनुरूप उत्तरोत्तर उसका अंतर्विकास करती चलती है।