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नामवर सिंह के उद्धरण

साहित्य की शक्ति में आवश्यकता से अधिक विश्वास करना; 'रोमांटिसिज़्म' हो सकता है, किंतु साहित्य को सर्वथा अशक्त मान लेना यथार्थवाद नहीं है।