Font by Mehr Nastaliq Web

विश्वनाथ त्रिपाठी के उद्धरण

साधना, भक्ति, प्रेम, विरह या रहस्य की भावनाएँ काव्याभिव्यक्ति में अमूर्त रहकर ही नहीं प्रकट होतीं, वे मूर्त होती हैं—अनुभव जगत् में उदित होकर।