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मनोहर श्याम जोशी के उद्धरण

रघुवीर आजीवन ठीक-ठाक-यह-भी-नहीं-लेकिन-ठीक-ठीक-वह-भी नहीं वादी, बल्कि—वादी-हाँ-लेकिन-वादी इत्यादि-इत्यादि रहा।