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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

प्रशंसा प्राप्त करते हुए आदमी का मुख दयनीय और हास्यस्पद होता है। उस समय उसके मुख पर वही दीनता और कृतज्ञता के भाव होते हैं, जो भिखारी के मुख पर होते हैं—जब कोई उसे अनायास एक-दो आने दे देता है।