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वात्स्यायन के उद्धरण

पाँचों नखों से स्तनों के उभार, अर्थात कुचाग्रों को अपनी ओर खींचने से उसके चारों ओर जो रेखाएँ बनती हैं—उसे 'मयूरपदक' नामक नखक्षत कहते हैं।