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वात्स्यायन के उद्धरण

नायक-नायिका के बहुत दिनों से प्रेम-संबंध होने के कारण; दोनों के परस्पर एक-दूसरे से पूर्ण परिचित एवं विश्वस्त होने से तथा दोनों के परस्पर अनुकूल होने से, दोनों की संभोग क्रिया 'अयंत्रित रत' कहलाता है।