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वात्स्यायन के उद्धरण

नायक और नायिका के राग (प्रेम) को बढ़ाने वाला, कोई और दूसरा सशक्त साधन नहीं है—जितना नखक्षत और दंतक्षत से उत्पन्न कामोत्तेजना।