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वात्स्यायन के उद्धरण

संभोग करते समय जब नायक अपने हाथ से लिंग को पकड़कर, जिस प्रकार मथानी से दही मथा जाता है; उसी प्रकार हाथ से लिंग को पकड़कर, योनि में डालकर लिंग से योनि को चारों ओर से मथता हुआ चारों ओर घुमाए, तो इस प्रक्रिया को 'मंथन' कहा जाता है।