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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

मेघदूत न कल्पना की क्रीड़ा है, न कला की विचित्रता। वह है प्राचीन भारत के सबसे भावुक हृदय की, अपनी प्यारी भूमि की रूपमाधुरी पर सीधी-सादी प्रेमदृष्टि।