आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण
करुणा की तीव्रता का सापेक्ष विधान, जीवन-निर्वाह की सुगमता और कार्य-विभाग की पूर्णता के उद्देश्य से समझना चाहिए।
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