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सुधीश पचौरी के उद्धरण

कबीर के सभी वर्णवादी आलोचक, रामानंदी चादर के कैनन से कबीर को बाहर नहीं निकलने देते। वे उन्हें पाँच हज़ार साल की अविच्छिन्नता में एक सामान्य घटना की तरह लेते है।