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जौन एलिया के उद्धरण

जो शख़्स बोलना नहीं जानता, उसे बोलना सिखाओ, लेकिन इस तवक़्क़ो (आशा) के साथ कि जब वह पहली बार रवानी से बोलेगा तो तुम्हें गाली देगा। जिसे लिखना नहीं आता, उसे लिखने की मश्क़ (अभ्यास) कराओ, पर नफ़्स (ख़ुद) की इस आमादगी (रज़ामंदी) के साथ कि जब वो लिखना सीख लेगा तो सबसे पहले तुम्हारे क़त्ल के महज़र (अधिपत्र) पर दस्तख़त करेगा।