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महात्मा गांधी के उद्धरण

जो संत अपने को पापी से श्रेष्ठ समझता है, वह अपना संतपन खो देता है और पापी से बुरा बन जाता है; क्योंकि पापी को यह ज्ञान नहीं होता कि वह क्या कर रहा है, जबकि संत को होता है या होना चाहिए।