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वात्स्यायन के उद्धरण

जो नायिका नायक के पास रहकर; सेवा करके भोग के योग्य होती है, वह संकेत करने पर भी ज्यों-की-त्यों रहती है। उसे किसी मर्मज्ञ विश्वस्त दूती द्वारा वश में करना चाहिए।