Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

जो लोग स्वार्थवश, व्यर्थ की प्रशंसा और ख़ुशामद करके वाणी का दुरुपयोग करते हैं—वे सरस्वती का गला घोंटते हैं।