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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

जो जाति जितनी प्राचीन होती है, उसके आदमख़ोरी के संस्कार भी उतने ही गहरे होते हैं। आदमी के द्वारा आदमी को खाने की विधियों को वह जाति धार्मिक, सामाजिक और दार्शनिक रूप तक दे डालती है।