महादेवी वर्मा के उद्धरण
इनके प्रकाशन के संबंध में मैंने कभी कुछ सोचा ही नहीं। चिंतन की प्रत्येक उलझन और भावना के हर एक स्पंदन के साथ छापेखाने का सुरम्य चित्र मेरे सामने नहीं आता।
-
संबंधित विषय : संवेदना