हरिशंकर परसाई के उद्धरण
गुरुकुलों, ऋषि-मुनियों, शिक्षा की पवित्रता, आदर्श आदि की बात करना पाखंड है। जो यथार्थ है, वह यह है कि शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ने और पढ़ानेवाले आमतौर पर भ्रष्ट हैं। अपवाद ज़रूर है, अनुपात भी कम है, पर वस्तुस्थिति यही है।
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