वात्स्यायन के उद्धरण
गुणयुक्त होने पर भी धनहीन अथवा मध्यस्थ गुणों वाला होने पर हीन कुल का (अकुलीन), अथवा धनवान् होते हुए भी पड़ोसी और माता-पिता एवं भाइयों के परतंत्र, अथवा बालकों जैसा स्वभाव वाला और दूसरों के घरों में आने-जाने वाले युवक, अलभ्य होने से कुलीन कन्या का वरण न करे अथवा ऐसे युवक का कन्या वरण न करे।
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