Font by Mehr Nastaliq Web

वात्स्यायन के उद्धरण

दूती को चाहिए कि वह शील-स्वभाव से प्रवेश कर कपट आख्यानों, शृंगारादि उपकरणों, लोककथाओं, सरस कहानियों, पराई नारी से संबंध रखने वाले परपुरुष की चर्चाएँ तथा उस नायिका के रूप, ज्ञान, उदारता और शील आदि की प्रशंसा करके, उसे प्रसन्न करे।