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महादेवी वर्मा के उद्धरण

अनुकरण तो मनुष्य का स्वभाव है, परंतु प्रत्येक कार्य की अंतर्निहित प्रेरणा को उसी रूप में समझ पाना—अपने-अपने बौद्धिक विकास पर निर्भर है।