रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण
अँग्रेज़ी हमारी प्रयोजन-सिद्धि की भाषा है, इसीलिए हमारी शिक्षा इस विदेशी भाषा के प्रति हमारे लोभ पर केंद्रित है। यह प्रेमी की प्रीति नहीं, कृपण की आसक्ति है।
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