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विष्णु शर्मा के उद्धरण

अधिक गुणशाली पात्र से गुणियों के गुण तिरस्कृत हो ही जाते हैं जैसे रात में चमकने वाली दीपशिखा सूर्य के उदय होने पर सुशोभित नहीं होती।