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वात्स्यायन के उद्धरण

अभियोगमात्र से साध्य, घर के दरवाज़े पर खड़ी होकर प्रायः बाहर झाँकने वाली, घर की छत पर चढ़कर सड़क की ओर देखने वाली, जवान पड़ोसियों के घर में गोष्ठी करने वाली, आने-जाने वालों को निरंतर देखने वाली, नायक के द्वारा देखे जाने पर तिरछी नज़र से देखने वाली, बिना कारण जिसका पति दूसरा विवाह कर लिया हो, पति से द्वेष करने वाली, जिसका पति उससे घृणा करता हो, जो निर्लज्ज एवं व्यभिचारिणी हो और जो संतानहीन हो—ये सहज सिद्ध हो जाती हैं।