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महात्मा गांधी के उद्धरण

अभिलाषा के बिना, इतने पदार्थ जगत के लिए पैदा होने ही चाहिए—यह समझकर परिश्रम करने का नाम निष्काम कर्म है और वह यज्ञ है।