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नामवर सिंह के उद्धरण

आचार्य रामचंद्र शुक्ल केवल साहित्य के विचारक, विवेचक और आलोचक ही नहीं है; बल्कि उनका गहरा संबंध उस व्यापक हिंदी नवजागरण से है, जिसने भारतीय जीवन में एक नई चेतना उत्पन्न की।