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वही चौराहा

wahi chauraha

लाल्टू

लाल्टू

वही चौराहा

लाल्टू

और अधिकलाल्टू

    वही चौराहा है

    एक कोने पर आकर मुड़कर देखता हूँ

    देखता ही रहता हूँ

    गाड़ी, बस, स्कूटर, ऑटो

    विश्व के तमाम चलमान यंत्र मेरे ऊपर चढ़ते आते हैं

    मैं अपने आपको सड़क की दूसरी ओर पाता हूँ

    सृष्टि के रहस्यों में है यह भी कि दिन के व्यस्ततम समय में

    शहर के इस चौराहे को मैं देर-सबेर पार कर ही लेता हूँ

    थोड़ी ही दूर पर अगली सदियों के लिए

    दरवाज़े हैं

    इन दरवाज़ों के ठीक विपरीत सड़क की दूसरी ओर

    जिवदानी आयुर्वेदी दवाख़ाना का बोर्ड लगाए तंबू लगे हैं

    बोलो प्रोफ़ेसर यह जो जवानी मर्दानगी पेशाब आदि की चिकित्सा करता टेप

    चलता रहता है निरंतर इन तंबुओं से

    आवाज़ जो इन भविष्य की सदियों के दरवाज़ों को पार करती हमारे साथ

    प्रविष्ट होती है आई.टी. संस्थान के अंदर

    यह उत्तर आधुनिक है

    या प्राक् आधुनिक

    मैं सड़क की आत्मा को महसूस करता हूँ

    मेरे साथ जीती है लंबे समय तक

    बड़ी की जगह ग़लती से इस्तेमाल की गई

    छोटी की मात्रा

    जीव जीवन जीना शब्द हैं साथ अगले दिनों के इंतज़ार में।

    स्रोत :
    • रचनाकार : लाल्टू
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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