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विद्या विद्यालय छूतछात

vidya vidyalay chhutchhat

आशाराम ‘जागरथ’

आशाराम ‘जागरथ’

विद्या विद्यालय छूतछात

आशाराम ‘जागरथ’

और अधिकआशाराम ‘जागरथ’

    ज्यादा ना गुन गावा साथी

    अपने आँखी देखे बाटी

    पेड़े-पालव कै जात हुवै

    मनन महियाँ यक्कै जाती

    मुलु काव कहै अध्यापक काँ

    इसकूले’म् जाति कै जड़ खोदैं

    ठकुरे काँ वै ‘बावू साहब’

    बाभन काँ ‘पंडित जी’ बोलैं

    सब कहैं ‘मौलवी’ मुसलमान काँ

    ‘मुंसी’ बाकी जाती काँ

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    जो जाति-पाँति कै ज़हर रहा

    कुलि इसकूलेन मा भरा रहा

    जे पढ़त रहा वोकरे माथे पै

    ऊँचौ-नीचौ लिखा रहा

    देखतै हमकाँ छाती फाटै

    तिरछी आँखी रहि-रहि ताकै

    ‘हमरे बेटवा के बगल बइठ

    धोबिया सार पढ़त बाटै’

    बिख उगिलकै खिसिक लिहिन वै तौ

    फइलाय ज़हर अंतरमन मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    यक दिन तौ देखेन हद होइ गय

    ‘कलुवा’ चमार कै भद पिटि गय

    अँजुरी से पानी पियत रहा

    यक उँगुरी लोटा मा छुइ गय

    कछ्छा दुइ महियाँ पढ़त रहा

    दुनिया-समाज से सिखत रहा

    इसकूले मा हल्ला होइ गय

    कि जान-बूझ कै छुवत रहा

    झाऊ कै डंडा घपर-घपर-घप

    सिच्छा पाइस पीठी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    खुब सुबुक-सुबुक ‘कलुवा’ रोवै

    रहि-रहि मुँह हाथे पोछि लियै

    लइकै तख्ती झोरा-बोरा

    पेड़े के नीचे खड़ा रहै

    रोवत-सोवत फिरु जाग गवा

    जइसै कि रस्ता पाय गवा

    यक ढेला जोर से पटक दिहिस

    भूईं थुकि कै भागि गवा

    वहि दिन बादी नाहिन देखा

    वोकाँ कउनौ इसकूले मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    जे जहाँ रहै खड़ा गड़ा

    आतंकी लोटा ह्वहीं पड़ा

    पिपरे कै चैली बीन-चून

    सब ढूह लगाइन बहुत बड़ा

    खुब नीक आग दहकाय लिहिन

    डंडा से लोटा डारि दिहिन

    जब लाल-लाल लोटा होइगै

    बहिरे निकारि ठंढाय लिहिन

    मन महा समिस्या दूर भवा

    जंग जीत लिहिन मैदाने मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    स्रोत :
    • पुस्तक : पाहीमाफी (पृष्ठ 177)
    • रचनाकार : आशाराम ‘जागरथ’
    • प्रकाशन : रश्मि प्रकाशन, लखनऊ
    • संस्करण : 2021

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