पीटर मर गया एक काग़ज़ी टियारा पहने हुए
जो प्रिंसेस पेपर डॉल्स की किताब से
काटकर बनाया गया था;
उसे शाही ठाठ पसंद थे, अलंकरण पट्टे और जवाहरात।
मुझे नहीं मालूम, उसने कहा,
जब वह अंत्य-देखभाल केंद्र में जगा,
मैं चैनल 57 पर बेट डेविस फ़िल्म समारोह देख रहा था,
और फिर—
अंतिम संस्कार के समय तनाव कम हुआ
जब किसी ने अंदाज़ा लगाया
कि ताबूत इसलिए बंद है
क्योंकि वह उसके भीतर
एक बड़ी विग और ऊँची एड़ियों वाले जूतों में पड़ा है
और किसी ने कहा कि वह तो हमेशा देर से ही आता है
शायद अभी यहाँ पहुँचा ही नहीं—
अभी भी अपना मेकअप ठीक कर रहा होगा।
और किसी ने कहा कि यह उसने ख़ुद चुना थथी।
चुना था!—
जबकि उसने तो बस इतना किया था
कि उतर गया
चाहना की खारी लहर में
उतना दूर जितना वह चाहता था
इतना मदहोश या नशे में
कि लगभग फ़र्क़ ही नहीं पड़ता था कि कौन है,
हालाँकि वे ख़ूबसूरत थे, उसकी ओर उमड़ते हुए
अपनी जल्दबाज़ी के सादे, मोहक संगीत में।
मेरा ख़याल है कि स्वर्ग एक पूर्ण स्थिर अवस्था है
इच्छा के समस्त लोकों के ऊपर
ठहरा हुआ, जहाँ स्वप्न देखते
और जागते हुए लोग घास पर लेटे रहते हैं
और भीगे घोड़े उनके बीच घूमते रहते हैं
जो उस संगीत के विशाल टुकड़े हैं
जिसमें हम शरीर के स्वर्ग में मरते हुए विलीन हो जाते हैं।
कभी-कभी हम जागते हैं और नहीं जानते
कि यहाँ आकर कैसे लेट गए
या किसने हमारे सिर पर
ये अस्थायी, अनमोल रत्न जड़ दिए।
और जब दुनिया के बख़ूबी तराशे हुए कंधे मौजूद हैं
वे गहरे गढ़्ढे जो चाहत से नीले पड़ गए हैं,
जब बाग़ों में लहराते घोड़ों का बेमिसाल रेशम मौजूद है
जब फल गरजते और झनकते हुए गिरते हैं
जब रूप और गुरुत्व के ये साधारण चमत्कार मौजूद हैं
तो वह क्या कर सकता था
हममें से कोई भी क्या ही कर सकता है
सिवाय इसके कि यही चाहे और माँग ले।
***
- रचनाकार : मार्क डॉटी
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित
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