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सूरज की क्रिया

suraj ki kriya

तैबा हबीब

तैबा हबीब

सूरज की क्रिया

तैबा हबीब

और अधिकतैबा हबीब

    जीवन में जीवित लोगों का टकरा जाना,

    होता है

    इंद्रधनुष के रंगों की तरह

    जो नहीं रहते सदा

    सूरज की तरह

    जिसको रौशनी देनी होती है

    रात अँधेरी को भी

    जिसको लगता भी है ग्रहण

    और चमका है पूर्ण

    पूर्णिमा रात को भी

    सूरज बनने से

    सूरज की क्रिया आसान नहीं हो जाती

    तुम्हारे हिस्से भी आएगी

    वही पीड़ा

    जो लिखी निति ने उसके लिए

    नहीं हिस्से में आया

    किसी का भी साथ

    जिसको चुना गया

    सबके लिए

    चंद्रमा की चाँदनी के लिए भी

    देखने वाला

    उसकी शीतलता देखते हुए

    स्मृतियों की यात्रा पर निकलता

    चलते-चलते, वहाँ भी पहुँच जाता

    मुस्कानों के उस बिखरे ढेर तक

    जहां से अब उमड़ता आँखों में सैलाब

    चंद्रमा को भी होना चाहिए था

    सूरज की तरह

    जिसकी होती

    अपनी रौशनी

    जिसको देखकर

    करता यात्रा कोई

    जिसकी नहीं होती

    अपनी स्मृति कोई।

    स्रोत :
    • रचनाकार : तैबा हबीब
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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