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सुंदर क्या है?

sundar kya hai?

केनेथ पैचेन

केनेथ पैचेन

सुंदर क्या है?

केनेथ पैचेन

और अधिककेनेथ पैचेन

    संकराती पथरेखा

    अंगारों के फ़र्श पर चलना

    चट्टानों की परत पर परत

    क्षितिज पर तैरती अकेली मछली

    सुदूर प्रांतों में विद्रोह

    विराम।

    और पुनः आरंभ...

    आँखों में गरम सलाख़ें

    फूटी मूँगफलियों से मृत शरीर

    उनका भी एक औचित्य है

    कुत्ते तक का एक औचित्य है

    विराम।

    और पुनः आरंभ...

    दुर्दिन में बाहर गड़े शिविर

    घृणा के हाथों में राइफ़लें

    आख़िर सही कौन है?

    क्या जीसस?

    क्या मनुष्य मात्र को प्यार करना ग़लत है?

    विराम।

    और फिर से आरंभ...

    संक्रामक हत्याएँ

    किंतु बँधे हाथ उलट कर पड़ते हैं

    'यह मेरा जीवन है सम्राट्

    और अपना जीवन मैं क्यों जियूँ?'

    विराम।

    और फिर से आरंभ...

    क्योंकि जब सब धोखा खा रहे हैं तो केवल

    एक मिथ्या का अपराधी नहीं हो सकता

    क्योंकि जब सब घृणा पा रहे हैं तो केवल

    एक अकेला घृणा नहीं कर सकता

    और पुनः आरंभ...

    मैं जानता हूँ कि बंद आकार खुलेंगे

    उड़ान को पंख मिलेंगे, संगीत को गायन—

    क्योंकि मानव की सारी शक्ति की

    सार्थकता शिव में है

    और समस्त अशिव नष्ट होगा

    क्योंकि अशिव अस्थाई है

    क्योंकि काला और गोरा,

    अँग्रेज़ और जर्मन

    अयथार्थ

    वे केवल प्रतिध्वनियाँ हैं

    उनके आकार, वर्ण, पेड़ों और फूलों

    की तस्वीरों की तरह अपने नाम—

    संकेत में सार्थक नहीं हैं—

    वे अपने में जीवंत हैं और उनमें यथार्थ निहित है

    और जो यथार्थ है वह सदा जीवंत है

    विराम।

    मैं मानता हूँ सत्य को

    मैं विश्वास करता हूँ कि जो सद्भाव

    मुझमें है वह सबमें होगा—

    मुझमें जो श्रेष्ठतम है

    वह सबमें है

    जो सुंदर है

    केवल वही पृथ्वी पर टिकेगा

    मुझे विश्वास है कि हर वस्तु के

    पूर्णत्व का रूप

    निर्धारित किया जा चुका

    और यदि हम अपने रूप में ठीक-ठीक

    उतर नहीं पाए हैं

    तो भी कोई हानि नहीं

    शायद बँधे आकार खुलेंगे

    क्या उड़ान को पंख मिल जाएँगे?

    क्या संगीत को गायन मिल जाएगा?

    क्या अशिव का विध्वंस होगा?

    क्या मनुष्यों के जीवन स्वच्छंद बनेंगे?

    क्या शक्ति शिव के लिए होगी?

    क्या मनुष्य की शक्ति को उसका सूर्य मिलेगा?

    क्या मनुष्य को शक्ति सूर्य बिंदु की भाँति प्रदीप्त हो उठेगी?

    क्या मनुष्य की शक्ति मृत्यु से मोर्चा ले सकेगी?

    सही क्या है?

    क्या युद्ध?

    विराम।

    और फिर आरंभ...

    संकराती पथरेखा

    सुंदर फ़र्श पर चलना

    आग की परतें

    अब मुक्ति बिलकुल निकट है

    कि कोई मनुष्य दूसरे मनुष्य को घृणा नहीं करेगा

    क्योंकि वह काला है,

    क्योंकि वह पीला है,

    क्योंकि वह गोरा है,

    या—क्योंकि वह अँग्रेज़ है

    या जर्मन है

    या धनी है

    या निर्धन है,

    क्योंकि हम सब मनुष्य हैं

    विराम।

    और पुनः आरंभ

    मुक्ति में अब विलंब नहीं,

    कोई मनुष्य दूसरे पर नहीं पनपेगा

    क्योंकि कोई मनुष्य अकेले उसका

    मालिक नहीं हो सकता जो सबका है

    क्योंकि जो सबके लिए है उसको एक विनष्ट

    नहीं कर सकता

    इस भयानक मार्ग पर ही

    मनुष्य अपने सहयोगी को सहारा देता है

    मैं मानता हूँ कि चाहे अभी हम

    अँधेरे में जा रहे हों

    शताब्दियाँ चाहे बीत जाएँ पर

    उजाला

    सारे संसार पर फूटेगा

    और मेरी आँखें आज ही चकाचौंध हो रही हैं

    विराम।

    और पुनः आरंभ...

    स्रोत :
    • पुस्तक : देशान्तर (पृष्ठ 459)
    • संपादक : धर्मवीर भारती
    • रचनाकार : केनेथ पैचेन
    • प्रकाशन : भारतीय ज्ञानपीठ, काशी
    • संस्करण : 1960

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