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सिर्फ़ कहने भर को

sirf kahne bhar ko

वियोगिनी ठाकुर

अन्य

अन्य

वियोगिनी ठाकुर

सिर्फ़ कहने भर को

वियोगिनी ठाकुर

और अधिकवियोगिनी ठाकुर

    कितना कुछ कहना था तुमसे

    सिर्फ़ कहने भर को

    वह सब कुछ जो सिर्फ़ ख़ुद से कहा गया

    तुमसे होकर उस पार भी जाया जा सकता है

    जहाँ कई जन्म पीछे हमने साथ बोए थे जामुन

    पर चख नहीं सके कभी उनका स्वाद

    मैं तब खिड़की पर ही खड़ी रही

    जबकि चाहती तो कूदकर थाम लेती तुम्हारा कंधा

    मैं चबा सकती थी तुम्हारे हाथ से चुनी हुई मूँगफलियाँ

    चूम सकती थी तुम्हारी जेब से उतारकर

    तुम्हारी प्रिय गिलहरी

    और तुमको भी तो…

    स्रोत :
    • रचनाकार : वियोगिनी ठाकुर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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