शेष होते हुए

गोविंद माथुर

शेष होते हुए

गोविंद माथुर

और अधिकगोविंद माथुर

    इस तरीक़े से नहीं

    पहले हमें सहज होना होगा

    किसी तनाव में

    टूटने से बेहतर है धीरे-धीरे

    अज्ञात दिशाओं में गुम हो जाएँ

    हमारे संबंध

    कच्ची बर्फ़ से नहीं कि

    हथेलियों में उठाते ही पिघल जाएँ

    आख़िर हमने एक-दूसरे की

    गर्माहट महसूस की है

    इतने दिनों तक

    तुमने और मैंने

    चौराहे पर खड़े होकर

    अपने आस्तित्व को बचाए रखा है

    ये ठीक है कि हमें

    गुम भी इसी चौराहे से होना है

    पर इस तरीक़े से नहीं

    पहले हमें मासूम होना होगा

    उतना ही मासूम

    जितना हम एक-दूसरे से

    मिलने से पूर्व थे

    पहले मैं या तुम

    कोई भी

    एक आरोप लगाएँगे

    समझ पाने का

    तुम्हें या मुझे

    और फिर महसूस करेंगे

    उपेक्षा अपनी-अपनी

    कितना आसान होगा

    हमारा अलग हो जाना

    जब हम किसी उदास शाम को

    चौराहे पर मौन खड़े होंगे

    और फिर जब

    तुम्हारे और मेरे बीच

    संवाद टूट जाएगा

    कभी तुम चौराहे पर

    अकेले होगे कभी मैं

    फिर हमें धीरे-धीरे

    एक दूसरे की

    प्रतीक्षा नहीं होगी

    कितना सहज होगा

    हमारा अजनबी हो जाना

    जब हम सड़कों और गलियों में

    एक-दूसरे को देख कर

    मुस्कुरा भर देंगे या

    हमारा हाथ एक औपचारिकता में

    उठ जाया करेगा

    हाँ हमें

    इतनी जल्दी भी क्या है

    ये सब

    सहज ही हो जाएगा

    फिर हमें

    बीती बातों के नाम पर

    यदि याद रहेगा तो

    सिर्फ़

    एक-दूसरे का नाम

    स्रोत :
    • रचनाकार : गोविंद माथुर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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