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शहद की मिठास

shahd ki mithas

नादिया इबराशि

नादिया इबराशि

शहद की मिठास

नादिया इबराशि

और अधिकनादिया इबराशि

    (दामिता, मिस्र 1965)

    मेरे पिता की अतिप्रिय

    नीली ओल्ड्स मोबाइल कार सहित

    नौका पर सवार हो

    मैंने और मेरे माँ-बाप ने

    नील नदी की पश्चिमी शाख़ा पार की

    दिन पुकार रहा है

    ख़ामोश आवाज़ों के साथ

    कबूतर कूकते हैं सफ़ेद मीनारों में

    गायें चरती हैं हरीतिमा ओढ़े पहाड़ों पर

    हवा से काँपता है ताड़ के वृक्षों का झुरमुट

    भैंसें घुमाती हैं पानी के चक्कों को

    किसान औरतों के पैरों में पायलें खनकती हैं

    स्याही से बनाए गए पक्षियों के टैटू

    आपस में बतियाते हुए

    मानो उड़ जाना चाहते हैं

    हम महान पाशा के घर आए हैं

    यह घर एक द्वीप-सा प्रतीत होता है

    संतरे के वृक्षों की सघनता के मध्य

    हमारे पिता झुकते हैं

    उस मुखिया के समक्ष

    भोजन में हमें कबूतर खिलाए गए हैं

    जिनके भीतर चावल भरे हैं

    उनके अलावा

    सुखाई गई ब्रेड

    ताज़ा क्रीम

    और सबसे अव्वल, शहद

    पिता बुदबुदाते हैं—

    “अल्लाह लानत भेजे

    राष्ट्रपति और तख़्तापलट पर

    …हमारा सुल्तान एक महान शख़्सियत था

    और तुम सबसे नायाब सलाहकार थे उसके…”

    मैं शहद के बर्तन में अपनी उँगली डुबोती हूँ

    और सारे बड़े लोग छूमंतर हो जाते हैं

    शहद के खेत में

    संतरे के पेड़ झूमते हैं

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : नादिया इबराशि

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