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षड्यंत्र

shaDyantr

रामकृष्ण परार्थी

और अधिकरामकृष्ण परार्थी

    हँ, हमरा डर अछि

    डर अछि हमरा

    अहाँ बन्न क' देब हमर

    इनकिलाबक आवाज

    विध्वंस क' देब हमर सभ आन्दोलन

    षड्यंत्रक जाल बिछाक'

    अपना आदमीकेँ पठाक

    अपन वाक्पटुता शैलीसँ

    दबा देब हमर सचुका बात

    मुदा सुनि लिअ

    हमहुँ चुप नहि रहब

    फेर लिखब

    सभक हाथमे जरैत मशालक कल्पना क'

    किसान-मजूरक डेगसँ डेग मिलाक'

    चलैत छविकेँ अपन स्मृतिमे बैठाक'

    एगो क्रांतिक गीत

    एगो इनकिलाबक कविता

    अहाँ फेर वैह करब

    जे आइ धरि करैत अयलहुँ अछि

    अपन कुर्सी बचाबय लेल

    अपना सत्ता षड्यंत्रमे लोककेँ फँसाबय लेल

    एगो अंतहीन बकबाद

    राष्ट्रीयता, देशप्रेम सन भावनात्मक बात

    कियैक त' एकर सिवा

    अहाँक कार्ययोजनामे नहि अछि

    रोजी-रोजगार आकि आर्थिक विकास

    अछि त' बस सत्ताक भूख

    कुर्सीक स्वार्थ

    मुँहमे राम बगलमे छूरी रखनहुँ

    अहाँ अपन फूसिऔका मिठगर बोलीसँ

    बनि जायब बेदाग

    बदनाम क' देब हमरा

    जे हमहीं मचौने रही उत्पात

    मुदा एगो बात फेरसँ सुनि लिअ

    हमहुँ नहि मानब हारि

    अहाँक यातनासँ

    अहाँक प्रताड़नासँ

    अहाँक सत्ताक अहंकारसँ

    अहाँक कुत्सित विचारसँ

    हम सदति लिखैत रहब

    जे सत्त छैक से बात...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 28)
    • रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2022

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