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सत्रह बरस का लड़का और ‘गे बार’

satrah baras ka laDka aur ‘ge baar’

अनुवाद : शायक आलोक

डेनेज़ स्मिथ

डेनेज़ स्मिथ

सत्रह बरस का लड़का और ‘गे बार’

डेनेज़ स्मिथ

और अधिकडेनेज़ स्मिथ

    जिन की गंध से भरा यह स्वर्ग

    यह मुबारक ज़मीन

    जहाँ समलैंगिक होने के बारे में सोचना

    और ‘हम’ कहना एक ही बात है।

     

    मुबारक हो वह नक़ली पहचान-पत्र

    और वह बाउंसर

    जो इस ज़रूरत को समझ गया—

    ज़रूरी समझे जाने की

    किसी जगह का होने की

    यह जानने की

    कि एक मर्द का स्वाद कैसा होता है—

    वोदका से लबालब और गुनाह से पाक।

     

    मुझे नहीं मालूम

    किस ख़ुदा से दुआ करूँ

    मैं मसीह की ओर देखता हूँ

    मैं नृत्य-मंच पर हर मुँह की ओर देखता हूँ

    मैं व्हिस्की और कोक मँगाता हूँ

    और उसका नाम रख देता हूँ—

    अपने नए उद्धारकर्ता का ख़ून।

     

    वह न्यायी है

    और वह मुझसे नाचने की इल्तिज़ा करता है

    उन मर्दों को हैरत में डाल देने के लिए

    जिनके सामने मैं अपने कूल्हों की 

    इस लचक को लेकर आया हूँ।

     

    वह फ़रमान देता है

    कि मेरा मुँह

    किसी अजनबी के मुँह में होना ज़रूरी है।

    मुबारक हो उस आदमी का मुँह,

    वह गीत जिस पर हम लड़खड़ाते हुए झूमते हैं

    उसकी ताल

    उसका पुल

    मेरी जाँघ और पीठ पर उसके हाथ की पूरी लंबाई

    और अब मुझे नहीं मालूम

    मैं किस मुल्क का बाशिंदा हूँ।

     

    मैं उसकी ज़बान पर बस जाना चाहता हूँ

    इंजील और उल्लास से बना
    एक घर तामीर करना चाहता हूँ

    मैं उसके दाँतों के पीछे

    एक पूरा शहर बसाना चाहता हूँ

    जहाँ गिरजाघरों के गायन-दलों के लड़के

    और अलमारियों में छिपे हुए लड़के

    पनाह पा सकें।

     

    मैं चाहता हूँ

    मेरा नया ख़ुदा

    उस मक्का को देखे

    जो मैंने उसके लिए बनाई है

    और कहे 

    वाह, क्या ख़ूब।

     

    या शायद

    मैं बस थोड़ा-सा मदहोश हूँ

    और पहली बार आज़ाद,

    इतना कि जिस चीज़ का स्वाद ले सकूँ

    उसी की इबादत करने को तैयार।

    स्रोत :
    • रचनाकार : डेनेज़ स्मिथ
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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